इब्तेदा - एक क़ोशिश...
एक छोटा सा प्रयास अपनी बात को अपनी ज़बान में अपने लोगों तक पहुँचाने का
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मेरी पहली कविता
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मेरी पहली कविता
अनंत का विस्तार
अनंत से
अनंत तक,
अर्थात शून्य..
शून्य की सत्ता
अकल्प
अपरिमित,
अनंत..
स्वप्न हमारे
अनंत
अपरिमित,
होने को सभी संभावित,
किन्तु यथार्थ में
शून्य।
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