माना कि तेरा जाना ऐ दोस्त, ज़रूरी है ।
कुछ देर ठहर जाओ, मेरी ग़ज़ल अधूरी है ॥
क्यों कोई मेरी ख़ातिर वक्त अपना करे ज़ाया,
मैं काश समझ पाता, सबकी मजबूरी है ॥
इतने न क़रीब आयें, कि दूर ही हो जायें,
इस से बेहतर बल्कि थोड़ी सी दूरी है ॥
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